Friday, September 30, 2016

भारतीय सेना पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल के पार..................

मोदी ने किये पाकिस्तानी हुक्मरानों के बोलती बंद, भारतीय सेना पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल के पार
भारतीय जनमानस को बहुत बड़ी राहत देनेवाली खबर, बरसों बाद सुनने को मिली। भारत ने पाकिस्तान की नींद उड़ायी है। बरसो बाद भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में एक बड़े हमले को अंजाम दिया और सर्जिकल स्ट्राइक को सफलता पूर्वक संपन्न किया है। इस घटना के साथ ही
भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे विश्व को बता दिया कि अब भारत नियोजित आतंक को नहीं सहेगा, बल्कि उसका जवाब भी देगा। याद करिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण का समय, जब उन्होंने सभी पड़ोसियों को आमंत्रित कर अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाने की ओर कदम बढ़ाया था। याद करिये वे कभी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर भी अचानक पहुंच गये थे, यानी उन्होंने लगातार पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने के प्रयास किये, यहां तक कि पठानकोट में हुए हमले पर भी उन्होंने कड़वे घूंट पीये। भारतीय प्रधानमंत्री के इस कड़वे घूंट पीने और बार-बार संयम अपनाने से पाक हुक्मरानों को लगा कि वे भारत के साथ पिछले इंदिरा युग से चले आ रहे प्रॉक्सी वार को मोदी युग में भी कामयाबी दिलाकर रख देंगे, पर उन्हें पता नहीं कि मोदी, तो मोदी है, जहां जाते हैं, अपनी वाकपटुता और कार्यशैली से सभी को अपना मुरीद बना लेते है, ऐसा मुरीद की सामने वाले शत्रुओं के परम मित्र भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिभा के कायल हो जाते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहनशीलता पर पाक हुक्मरानों ने तो यहां तक कह दिया कि अगर पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार किया तो उसके बम केवल शो पीस के लिए नहीं बना है, यानी हर वक्त धमकी, हर वक्त उन्माद फैलाने की बात, आतंकियों की भी एक जमात बनाना, एक अच्छा आतंकी और दूसरा बुरा आतंकी। हर वक्त भारत को देख लेने की बात, पाकिस्तान की ओर से सुनाई पड़ रही थी। जिसका जवाब पाकिस्तान को देना जरुरी था। इसी बीच उड़ी की घटना और 18 भारतीय जवानों की मौत ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अंदर से हिलाकर रख दिया। जब यह घटना घटी थी तो हम एक-दो दिनों के बाद रांची के खादी बोर्ड के मुख्यालय में पहुंचे थे, जहां खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ, अरुण श्रीवास्तव और कई गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे। मैंने उसी समय कहा था कि उड़ी घटना के बाद, आज जो सोशल साइट्स या भारत के विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बेवजह हमले हो रहे है, शायद उन्हें पता नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे मिट्टी के बने हुए है। मैंने उसी समय कह दिया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वे इसका बदला जरुर लेंगे तो इसका मतलब है कि वे बदला जरुर लेंगे और लीजिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बदला ले लिया। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो साफ कह दिया था कि कश्मीर के गीत गानेवाले पाकिस्तान के हुक्मरानों से हमें अब बात नहीं करनी। उन्होंने साफ कहा कि आतंकी कान खोलकर सुन लें, हमारा देश उड़ी हमले के शहीदों की कुर्बानी कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि हमसे हजार साल लड़ने की बात कहनेवाले पाक के हुक्मरानों की चुनौती मैं स्वीकार करता हूं।
ऐसे में हम अपने माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बातों पर कैसे विश्वास नहीं करते। गर्व करिये, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज इतिहास बनाया है, पहली बार 1971 में बनी लाइन ऑफ कंट्रोल को भारतीय सेना ने पार किया, जिसका ऐलान संवाददाता सम्मेलन कर भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि पैरा कमांडोज हेलिकॉप्टर से एलओसी पहुंचे, फिर पैदल ही पाक के कब्जे वाले कश्मीर में 3 किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकियों के 7 कैम्प ध्वस्त कर दिये। इस घटना से पाकिस्तान इतना तिलमिलाया कि उसके प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस स्ट्राइक की निंदा कर दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का बयान था कि यह सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान पर हमला है, उसे कमजोर समझने की कोशिश न समझा जाये।
लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह के अनुसार उन्हें विश्वस्त सूत्रों से सटीक जानकारी मिली थी कि आतंकी एलओसी के साथ लॉन्चपैड्स पर इकट्ठे हुए है। उनका मकसद भारत में घुसपैठ करने आतंकी हमले को अंजाम देना था। भारत ने उन लॉन्चपैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया। इन हमलों के दौरान आंतकियों और उनके समर्थकों को भारी नुकसान हुआ है। कई आतंकियों को मार गिराया गया है। इस घटना की जानकारी पाकिस्तानी सेना को भी दे दी गयी। इधर पाकिस्तान इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने स्वीकार किया कि भारत ने भीमबेर, हॉटस्प्रिंग, केल और लिपा सेक्टर पर हमले किये है। इधर पाकिस्तान सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि इस हमले में उसके दो सैनिक मारे गये और नौ घायल हुए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इस बयान को पाकिस्तानी अखबार डान ने प्रमुखता दी है। हमें अपने भारतीय सेना पर गर्व है, हम भारतीयों को गर्व है, ऐसे कमांडोज पर जिन्होंने उड़ी की घटना का बहुत जल्द ही बदला ले लिया। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उन नीतियों की भी प्रशंसा करते है, जिन नीतियों के कारण आज पाकिस्तान पूरे विश्व में मुंह दिखाने के लायक नहीं। हम प्रशंसा करते है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिनके कार्यों से आज पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ा है, भारत की साख बढ़ी है और विश्व के विभिन्न देशों में रह रहे भारतीय शान से स्वयं को भारतीय कहलाने पर गर्व महसूस कर रहे है।
(यह आर्टिकल आज रांची से प्रकाशित आजाद सिपाही नामक समाचार पत्र में संपादकीय पृष्ठ संख्या 11 पर प्रकाशित हुई है।)

Thursday, September 29, 2016

थाली में छेद..........

क्या होता है थाली में छेद?
आम तौर पर अगर किसी व्यक्ति को आप कहे कि वो तो जिस थाली में खाता है, उसी थाली में छेद करता है, बस देखिये जिसके बारे में कहा गया, वह व्यक्ति ये वाक्य बोलनेवाले व्यक्ति का किस प्रकार मुंह नोच लेता है, अगर मुंह नोचने की ताकत नहीं तो फिर उससे वह वो बदला लेगा, जिससे ये वाक्य बोलनेवाले की नानी – दादी याद आ जायेगी।
आम तौर पर इस लोकोक्ति का प्रयोग सर्वाधिक हो रहा है, खासकर तब, जब किसी को नीचा दिखाने की जरुरत हो। सर्वाधिक इस लोकोक्ति का प्रयोग वे लोग करते है, जो अपना जमीर बेच चुके होते है, भले ही उसका कारण कुछ भी हो।
आजकल बहुत सारे पत्रकारों का समूह अपना जमीर बेचकर विभिन्न संस्थानों में कार्य कर रहा है और अपने संस्थान के मालिक अथवा संपादकों के इशारे पर वह कुकृत्य कर रहा है, जिसकी इजाजत उसका जमीर भी नहीं देता, पर दूसरों को उल्लू बनाने के लिए वह इस डायलॉग का प्रयोग खुब करता है कि वह जिस थाली में खाता है, उस थाली में छेद नहीं करता, यानी उसके कुकृत्यों से देश का भले ही नुकसान हो जाये, या यो कहें कि देश की थाली में भले ही छेद हो जाये, पर उस संस्थान या मालिक की थाली में छेद नहीं होना चाहिए, जिसने देश का नुकसान करने का बीड़ा उठा लिया है।
जरा देखिये, एक से एक नमूने है...
पटना में एक संवाददाता है, खूब नीतीश की परिक्रमा करता है, उसे नीतीश में खुदा नजर आता है, कभी – कभी उसके सपने में नीतीश तीर लेकर राम के रुप में भी आ जाते है, इसलिए नीतीश के खिलाफ वो सुनना ही नहीं चाहता और चूंकि अब लालू भी नीतीश के साथ हो गये तो वह लालू को हनुमान के रुप में हृदय में धारण किये है, ये अलग बात है कि इनके कुकृत्यों से बिहार का जो नुकसान होना है, वो हो ही रहा है, पर चूंकि वह जिस संस्थान में काम करता है उसका मालिक स्वयं नीतीश की पार्टी से विधायक बना हुआ है, इसलिए वह लालू और नीतीश के बारे में कुछ सुनना ही नहीं चाहता, पर मोदी के खिलाफ विषवमन करने की बात हो तो देखिये वह अपने मालिक को खुश करने के लिए हद से भी गुजर जाता है। अब ऐसे लोगों से क्या बात करनी।
कल ही की बात है उक्त सज्जन को एक व्यक्ति ने उसे आइना देखाने की कोशिश की, तो उसका जवाब था कि झारखंड सरकार के पैसे पर अपना काम चलाने वाले लोग अगर नैतिकता की दुहाई दें तो यह शर्म की बात है?
हमारा उत्तर - क्या झारखण्ड सरकार में काम करना और उस काम का पैसे लेना अनैतिक है?
हम बताते है कि अनैतिक क्या है? झारखण्ड सरकार के आगे विज्ञापन के लिए नाक रगड़ना और उस विज्ञापन के पैसे से अपना पेट चलाना और उसके बाद अपना जमीर गिरवी रख देना, यह अनैतिक है। जो आजकल सभी कर रहे है। हमारे पास एक नहीं कई उदाहरण है। बिहार में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे। उन्होंने ईटीवी पर ऐसा जादू डाला कि रात्रि के नौ बजे के समाचार में 18 मिनट नीतीश का ही समाचार येन केन प्रकारेन चलता रहा और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की खबर तेल लेने चली गयी। ये कुछ उदाहरण है और मैं फिर ताल ठोंक कर कहता हूं कि बिहार में कई चैनल या अखबार है, पत्रकार है, जो नीतीश और लालू के दरबारी है। और अब हम आपको बताते है कि अनैतिक क्या है?
क. जमीर बेचना अनैतिक है।
ख. जमीर बेचकर अपने मालिक और संस्थानों के लिए सिर्फ जीना और इसकी आड़ में देश को नुकसान पहुंचाना अनैतिक है।
ग. अपने गिरेबां में नहीं झांकना और दूसरों पर झूठा आरोप लगाना अनैतिक है।
घ. कोई भी व्यक्ति कहीं भी काम कर सकता है, चाहे वह सरकारी सेवा में रहे या निजी संस्थाओं में, ध्यान यह रहे कि वह कहीं भी काम कर रहा है, पर अपना जमीर तो नहीं बेच रहा। अगर जमीर बेच दिया, देश को नुकसान किया, एकतरफा सोच रखा तो अनैतिक है।
ङ. हां, हर बात में अपने मालिक की हां में हां मिलानेवाला, देश का सबसे बड़ा शत्रु और अनैतिक है, क्योंकि वह सही मायनों में देश की थाली में छेद कर रहा है, जिससे अंततः उसका भी नुकसान होता है, क्योंकि वह देश से अलग नहीं है।

Tuesday, September 27, 2016

कमाल है........................

रांची में नकली शक्तिवर्द्धक दवा के करोड़ों के कारोबार से संबंधित समाचार आजकल अखबारों में सुर्खियां बटोर रहे है। प्रतिदिन समाचार आ रहे है कि रांची के चुटिया, लालपुर, सुखदेवनगर आदि इलाकों में औषधि नियंत्रण निदेशालय की ओर से इन दवाओं के कारोबार में लिप्त लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है, इनके खिलाफ छापेमारी भी की जा रही है। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में औषधि निर्माण के उपकरण, एलोपैथिक दवाएं, इंप्टी हार्ड जेनेटिक कैप्सूल सेल, लिंग वर्द्धक यंत्र, स्तन वर्द्धक यंत्र आदि बरामद हो रहे है। इस धंधे में लिप्त छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। औषधि निदेशालय इस धंधे में सलिप्त किसी अलख देव सिंह की तलाशी कर रहा है, पर औषधि निदेशालय उन अखबारों पर शिकंजा नहीं कस रहा, जो इस धंधे को संजीवनी दे रहे है, या इससे सीधा मुनाफा उठा रहे है। हाल ही में जब औषधि निदेशालय ने इन कारोबारियों पर जब अपना शिकंजा कसना शुरू किया तो एक दिव्य ज्ञान प्रदान करनेवाले एक अखबार ने लिखा कि इस धंधे में पोस्टआफिस के लोग शामिल है, पर उसने यह नहीं लिखा कि इस धंधे में अखबार के लोग भी शामिल है, जो विज्ञापन के नाम पर इन कारोबारियों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाते है और स्वयं भी लाभान्वित होते है, साथ ही सामान्य जनता को दिग्भ्रमित भी करते है।
सच्चाई यह है कि ये सारे के सारे कारोबारी बिना अखबार को अपने तरफ मिलाए इतने बड़े कारोबार को अंजाम नहीं दे सकते। इसमें अखबार की सबसे बड़ी भूमिका होती है, वे इन कारोबारियों द्वारा मिले विज्ञापन को जमकर छापते है, रांची में कमोबेश सभी बड़े अखबार इस धंधे में लिप्त है और इसके द्वारा अपनी आर्थिक समृद्धि में लगे है। आज भी देख लीजिये – कौन ऐसा अखबार है जो इस धंधे में लिप्त नहीं है। एक अखबार तो अपना वर्गीकृत इसी धंधे को समर्पित कर दिया है। अगर उसके वर्गीकृत विज्ञापन को देखिये तो पता लग जायेगा कि इस धंधे में उसका जोर भी नहीं है, पर बेशर्मी इतनी कि उसे बेशर्म शब्द की परिभाषा से कोई लेना – देना भी नहीं।
आश्चर्य है कि इस धंधे में कौन-कौन लोग है, सभी को पता है, पर क्या मजाल कि इन अखबारों पर कोई भौं भी टेढ़ा कर दें, क्योंकि जैसे ही इन अखबारों पर शिकंजा कसेगा, सत्ता और विपक्ष में बैठे एवं छपास की बीमारी से पीड़ित नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और सम्मान के लालचियों का समूह इन अखबारों के पक्ष में बयानबाजी शुरू करेगा और नकली डायलॉग बोलेगा कि यहां अखबारों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है, लोकतंत्र खतरे में पड़ गया आदि-आदि। यानी कुल मिलाकर, जो इस धंधे में लिप्त है, उनके उपर शनि की वक्र दृष्टि और जो इस धंधेबाजों से अपनी आर्थिक समृद्धि कर रहे है उनके उपर शुक्र की महादृष्टि मजे लीजिये और क्या?

Monday, September 26, 2016

प्रभात खबर दूसरों के लिए अखबार नहीं आंदोलन और जब अपने पर आये तो.............

प्रभात खबर दूसरों के लिए अखबार नहीं आंदोलन और जब अपने पर आये तो आंदोलन घूस गया भीतरअअअअअअअ....................
कल यानी 25 सितम्बर को रांची से प्रकाशित सभी प्रमुख अखबारों (प्रभात खबर को छोड़कर) ने एक खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर था ऊषा मार्टिन के कार्यालयों पर सीबीआइ छापा, पर प्रभात खबर में ये खबर ढूंढने पर कहीं नहीं मिली। आखिर क्यों नहीं मिली भाई, आप तो अखबार नहीं आंदोलन हो। आप तो खोजी पत्रकारिता के मिसाल हो, यह खबर आपकी नजरों से कैसे फिसल गयी। आप तो रिम्स के चंद्रमणि की झूठी खबरों के आधार पर, उसका जीना मुहाल कर देते हो। पूरे राज्य को बदनाम कर देते हो और जब अपने पर आयी तो उलटे पांव दौड़ते हुए अपने घरों में छुप जाते हो। तुम्हें तो जवाब देना ही होगा, जनता को, क्योंकि कई मुद्दों पर तुम खुब फोन मंगवाते हो, पत्र मंगवाते हो, इ-मेल से पाठकों के मंतव्य मंगवाते हो, पर सीबीआइ के छापे पर मौन व्रत तुमने क्यों धारण कर लिया।
दोस्तों मैं बताता हूं कि इस अखबार ने मौन व्रत क्यों धारण कर लिया। वह इसलिए धारण कर लिया क्योंकि यह अखबार ऊषा मार्टिंन का ही है, चूंकि अपनी इज्जत बची रहे, इसलिए उसने इस समाचार को अपने पृष्ठों पर जगह ही नहीं दी, पर खबर आपको मालूम होना चाहिए।
खबर यह है कि 24 सितम्बर को ऊषा मार्टिन के दो दफ्तरों पर सीबीआइ की दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा की टीम ने छापा मारा। सूत्र बताते है कि यह छापा उस पर अपने प्लांट के लिए आवंटित आयरन ओर का इस्तेमाल स्वयं न कर बाजार मूल्य पर बेचने के आरोप के मद्देनजर पड़ा है। सीबीआइ ने शनिवार को ऊषा मार्टिन के बड़ाजामदा और कोलकाता स्थित दफ्तरों पर छापा मार कर दस्तावेजों की जांच भी की। हम आपको बता दें कि ऊषा मार्टिन को एमएमडीआर एक्ट के तहत बड़ाजामदा लौह अयस्क खदान कैप्टिव प्लांट के लिए आवंटित किया गया था। कैप्टिव प्लांट के लिए आवंटित माइंस की शर्त यह है कि वह केवल अपने प्लांट के लिए ही अयस्क का प्रयोग कर सकता है, लेकिन इस कंपनी ने अन्य कंपनियों को बाजार मूल्य पर लौह अयस्क मुहैया कराया। इस मामले में जस्टिस शाह की अध्यक्षता में गठित कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में पश्चिम सिंहभूम में हो रहे अवैध खनन का मामला उठाया था। शाह कमीशन ने स्थल जांच कर रिपोर्ट दी थी कि सभी आयरन ओर कंपनियां मानकों का उल्लंघन कर सीमा क्षेत्र से अधिक उत्खनन कर रही है।
मतलब समझ गये न भैया – ये है अखबार नहीं आंदोलन का दोहरा मापदंड..........................

Saturday, September 24, 2016

फर्श पर भोजन........................

रिम्स में एक मनोरोगी लावारिस मरीज को फर्श पर भोजन देने का मामला रांची से प्रकाशित दो प्रमुख अखबारों दैनिक भास्कर और प्रभात खबर ने उठाया। ये ऐसा मामला था जो मानवीय दृष्टिकोण से किसी भी प्रकार से सहीं नहीं ठहराया जा सकता, और जैसा कि पहले से ही पता था कि ये मामला तूल पकड़ेगा और तूल पकड़ा भी...
दो अखबारों ने इस प्रकरण का श्रेय लेने के लिए प्रथम पृष्ठ पर खबर छापा - एक ने लिखा प्रभात खबर की खबर पर पहल तो दूसरे दैनिक भास्कर ने लिखा दैनिक भास्कर ने छापी थी खबर।
राज्य सरकार ने 24 घंटे में ही फैसला लिया और खाना परोसनेवाले कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारी चंद्रमणि प्रसाद को बर्खास्त कर दिया। चंद्रमणि ने अपनी बर्खास्तगी पर जो बयान दिया है, वो बयान दैनिक जागरण ने छापा है इस खबर को भी पढ़िये तो पता चलेगा कि आजकल दया करना भी कितना भारी पड़ता है, जिसे इन दोनों अखबारों ने नहीं छापा है। चंद्रमणि कोई टाटा बिड़ला या अडानी समूह का व्यापारी नहीं है, वह भी आदमी जैसा दिखनेवाला ही प्राणी है।
न्यायालय ने भी स्वतः संज्ञान लिया है, अपने अनुसार और कह डाला कि अपराध है फर्श पर खाना परोसना सरकार जवाब दें। ये कथन हालांकि एक भला मानुष भी जानता है कि फर्श पर खाना परोसना अमानवीय है।
एक और बयान आया है कोई रोजी रोटी अधिकार अभियान की संयोजिका है कविता, जिसने कह डाला कि जहां आज भी फर्श पर खाना परोसा जाता है, वहां भारत माता की जय कैसे बोले। कविता का यह कथन बता रहा है कि जैसे लगता है कि भारत माता चंद्रमणि को आकर बोली कि तुम उक्त मनोरोगी महिला को फर्श पर भोजन परोस दो, यानी स्वयं मानसिक रुप से बीमार है और दूसरों को ज्ञान दिये जा रहे है। कविता ने तो इस प्रकरण पर ऐसा बयान दिया कि जैसे भारत माता विलेन हो, खलनायिका हो।
हमारे देश में इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं हमेशा इक्के-दूक्के जगह देखने को और सुनने को मिलती है, इसका मतलब ये तो नहीं कि हम भारत माता को ही कटघरे में रख दें। आपकी घटिया सोच और घटिया मनोवृत्ति के लिए भारत माता दोषी कैसे हो गयी, लेकिन जब आप वामपंथी होंगी या वामपंथ में ही भारत का निर्माण दिखेगा तो भारत माता आपकी नजरों में विलेन तो दिखेंगी ही।
इधर रांची में विभिन्न प्रकार का एनजीओ चलानेवाले और स्वयं को गरीबों का मसीहा बतानेवालों का अधिवेशन चल रहा है, ये वो लोग है, जो एनजीओ के माध्यम से राज्य व केन्द्र सरकार की विकासात्मक योजनाओं और गरीबों के लिए चलनेवाली योजनाओं को खुद गड़प कर जाते है, वे डायलागबाजी कर रहे है।
फर्श पर भोजन प्रकरण, कुछ नहीं, हमारी घटिया मानसिकता का घोतक है, हम स्वयं को तो मनुष्य मानते है, पर सामनेवाले को मनुष्य मानने को तैयार नहीं। हर प्रकार का कुकर्म करेंगे और स्वयं द्वारा किये गये कुकर्म को औरों से बेहतर मानेंगे और दोष ठहरायेंगे भारत माता को। वामपंथी बनेंगे, एनजीओ बनायेंगे और अपने बेटे-बेटियों को दूसरे महानगरों में बसायेंगे और कहेंगे कि भारत माता की जय कैसे बोले। लाशों की राजनीति करेंगे, गुंडों, अपराधियों और देशद्रोहियों की मदद करेंगे और बोलेंगे कि भारत माता की जय बोले कैसे। जैसे कल का ही अखबारों में छपा भाकपा माले के महासचिव दीपंकर का वह बयान पढ़ लीजिये, जिसमें उसने कहा कि बुरहान वानी आतंकी नहीं था।
अब आप समझ लीजिये कि कौन इस प्रकार की व्यवस्था के लिए दोषी है। राज्य व केन्द्र सरकार या हमारी घटिया स्तर की सोच। जिसमें हम स्वयं को तो श्रेष्ठ और बाकियों को दो कौड़ी का नागरिक समझते है।

Wednesday, September 21, 2016

शहीदों के नाम पर हिन्दुस्तान अखबार और छपास की बीमारी से पीड़ित नेता.............

सदैव अश्लील व अनैतिक विज्ञापनों को प्रकाशित करनेवाला तथा बच्चों में मानसिक विकृतियों का जन्मदाता हिन्दुस्तान अखबार के हृदय में 20 सितम्बर को देशभक्ति का ज्वार फूंटा। उसने अपने विशेष माध्यम से लोगों को उड़ी की याद दिलाई और लोगों से कैंडल मार्च में शामिल होने का अनुरोध कर डाला, चूंकि हिन्दुस्तान अखबार ने अनुरोध किया तो जितने भी छपास की बिमारी से पीड़ित नेता (चाहे वे किसी भी पार्टी के क्यों न हो) और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग उनके कार्यक्रम में आ धमके, खूब फोटो सेशन कराया, हंसा – हंसाया और फिर रोजमर्रा के कामों में जूट गये। इन्हें न तो देशभक्ति से मतलब था और न ही उड़ी की घटनाओं से, चूंकि अखबार को आदमी चाहिए थे, अपने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए, उन्हें आदमी मिल गये और जिन्हें चेहरे चमकाने थे, उनके चेहरे चमक गये, पर जिन्होंने उड़ी के नाम पर ये सब किया, उनसे कुछ सवाल तो मैं जरुर पूछना चाहुंगा।
सवाल नं. 1 – क्या उड़ी में शहीद हुए सैनिकों की आत्मा या उनके परिवार के लोगों ने उनसे ऐसा कार्यक्रम आयोजित करने को कहा था, क्या?
सवाल नं. 2 – क्या कोई बता सकता है, कि जो लोग इस कार्यक्रम में शामिल थे, उनके परिवार के कितने लोग सेना या केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों में कार्यरत है?
सवाल नं. 3 – क्या जिस प्रकार का ये फोटो सेशन कराये हैं और इस मर्माहत होनेवाली घटनाओं में दांत निपोड़ें है, उनके घरों में भी ऐसी हादसा होने पर, वे इसी प्रकार दांत निपोड़ा करते है क्या?
सवाल नं. 4 – क्या इस प्रकार के आयोजन से माइलेज लेने की जो नई प्रवृत्ति का जन्म हुआ है, उससे पता नहीं चलता कि लोगों में संवेदनशीलता समाप्त हो गयी और लोग इस शहादत का भी व्यवसायीकरण करने में लग गये, ये कहकर कि लोग जाने कि हिन्दुस्तान अखबार का जवाब नहीं और जब अखबार में काम करनेवाले लोगों में संवेदनशीलता है ही नहीं तो इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के मायने क्या है?
आप पूछेंगे कि ये सब लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ी, आवश्यकता है, हमारे पास प्रमाण है कि इस दुख भरी घटना में, जहां सारे देश में उबाल है, एक नेता मुस्कुरा रहा है, और अगर यह दृश्य देखना है तो धनबाद से प्रकाशित हिन्दुस्तान का पृष्ठ संख्या 3 देखिये, जिसमें भाजपा सांसद पी एन सिंह मुस्कुराते हुए फोटो खींचा रहे है, जैसे लग रहा है कि फोटो सेशन चल रहा है, यहीं भाजपा समर्थित एक मेयर भी है, उसके चेहरे को भी पढ़ने की कोशिश कीजिये, कैसे वह फोटो सेशन में स्वयं को समाहित कर रहा है और पृष्ठ संख्या 4 देखियेगा तो आपको सब कुछ क्लियर हो जायेगा, कि हिन्दुस्तान अखबार का बैनर लेकर लोग कैसे आनन्दित हो रहे है, मुस्कुरा रहे है, जैसे लगता है कि देश में कोई जश्न का माहौल हो...यहीं नहीं इस अखबार में काम करनेवाले कई कर्मचारियों ने तो गजब कर डाला है, फोटो खिंचवाया तो खिंचवाया, उसे बड़े शान से सोशल साइट्स पर भी डाल दिया। लीजिये देखिये, हिन्दुस्तान अखबार के कारनामे, फोटो सब कुछ क्लियर कर दे रहा है...

Saturday, September 17, 2016

कौन है पंकज पाठक.................

कौन है पंकज पाठक?
जानिये पंकज पाठक को। पंकज पाठक को 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया है। उस पर आरोप है कि उसने अडानी पावर लिमिटेड के गोपनीय दस्तावेज बेचे है। किसको बेचे है, किसलिये बेचे है, अब तक पुलिस पता नहीं लगा पाई है। आज के विभिन्न अखबारों को देखने से पता चलता है कि वह रह – रह कर अपना बयान बदल रहा है। हिन्दुस्तान अखबार के अनुसार, उसके बयान है कि अगर वह मुंह खोलेगा तो कई बड़े लोग फंसेंगे। कौन लोग फंसेंगे जाहिर है, जिसका वह नाम लेगा, पर वह जिसका नाम लेगा, वे फंस ही जायेंगे, इस बात में दम नहीं है, क्योंकि जिन्हें उसके नाम लेने से फंसने का डर है, वे जरूर अब तक अपनी सुरक्षा के बड़े-बड़े बांध बना लिये होंगे। फिर भी हमारा पंकज से आग्रह होगा कि वह सत्य के साथ रहे और सत्य का अनुसरण करते हुए, अपनी बात बिना किसी भय के कानून के समक्ष रखे, क्योंकि सत्य में ही सिर्फ ताकत होती है। सत्य ही उसे बचायेगा, बाकी असत्य की क्या भूमिका होती है, वह सब को पता है।
पंकज को मैं अच्छी तरह जानता हूं, अनेक बार उससे मिला हूं। फेसबुक पर भी बाते होती रही है, कई बार फोन पर बात किया हूं। जब वह प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश का पीए हुआ करता था, तब तो ज्यादा ही बाते हुआ करती थी। उसके आलेख बराबर प्रभात खबर के संपादकीय पृष्ठ पर दीख जाया करते थे। एक दो आलेख तो दैनिक जागरण में भी उसके छपे है, वे भी राष्ट्रीय स्तर पर। फेसबुक पर उसके धारदार पोस्ट तो प्रभात खबर में काम करनेवाले संपादकों से लेकर नीचे के कर्मचारियों तक को कमेंट्स करने पर मजबूर कर देते थे, चाहे वे विजय पाठक हो या अभी दूसरे जगहों पर कार्य कर रहे स्वयं प्रकाश, इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि उस बच्चे में प्रतिभा है और प्रतिभा के बल पर कई वर्षों तक उसने प्रभात खबर को अपनी सेवा दी।
आखिर प्रभात खबर में शीर्ष पर रहनेवाला पंकज अडानी पावर लिमिटेड में जाते ही अपराध कैसे कर बैठा? ये सवाल रहस्यमय बना हुआ है और इस रहस्य को सुलझाना झारखण्ड पुलिस के लिए बहुत ही जरूरी है, ऐसे तो ये सवाल से पर्दा उसी समय उठ गया, जब पंकज ने यह बयान दिया कि “मुंह खोलूंगा तो फंसेंगे कई बड़े लोग”। भाई पंकज, मुंह खोल ही दो, किसके लिए धर्मसंकट में फंसे हो। उपनिषद कहता है – धर्मों रक्षति रक्षितः।
हां, एक बात के लिए प्रभात खबर को जरुर दाद दूंगा कि उसने तुम्हारी फोटो अभी तक अपने अखबार में इस प्रकरण में नहीं छापी, शायद वह इस बात को आज भी आत्मसात किये हुए है कि तुम वहां कभी काम किये थे, चलो प्रभात खबर ने इतना तो अपना धर्म निभाया, नहीं तो वो कितना धर्म निभाता है, मैं जानता हूं। हमें तो लगता है कि कुछ न कुछ जरूर गड़बड़ है, जिससे पर्दा उठना चाहिए और ये पर्दा तुम्हीं उठाओगे। ईश्वर सदैव तुम्हारे साथ है, सत्य का साथ कभी मत छोड़ना।

Thursday, September 15, 2016

चूंकि प्रभात खबर कह रहा है, तो मान लीजिये...............

चूंकि प्रभात खबर कह रहा है, तो मान लीजिये कि आज अनन्त चतुर्दशी नहीं, बल्कि आज ऋषि पंचमी है...
हां, भाई हां...
आज अनन्त चतुर्दशी नहीं, बल्कि आज ऋषि पंचमी है, क्योंकि झारखण्ड का सर्वाधिक प्रसारित हिन्दी दैनिक प्रभात खबर के अनुसार आज अनन्त चतुर्दशी नहीं, बल्कि ऋषि पंचमी है, इसलिए आज सभी ऋषि पंचमी व्रत करें, क्योंकि प्रभात खबर कभी झूठ नहीं बोलता।
हमारे राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास तो कई जगहों पर बोल चुके है कि पत्रकारिता हो तो प्रभात खबर जैसी, नहीं तो पत्रकारिता हो ही नहीं। वे तो प्रभात खबर पर इतने खुश रहते है कि वे मुक्त कंठ से उस पर जमकर अर्थ लूटाते रहते है, उस अखबार के संपादक या प्रबंधक या मालिक के एक इशारे पर उनके कार्यक्रमों में लाख व्यस्तताओं के बावजूद दिखाई पड़ जाते हैं...
इसलिए मैं कह रहा हूं कि सभी लोग प्रेम पूर्वक आज ऋषि पंचमी व्रत मनाएं...
एक बात और
अगर कोई पूछे कि आज कौन सा दिन है...
तो भूल कर भी आज वृहस्पतिवार है, ऐसा न कहें...
प्रेम से हृदय में प्रभात खबर अखबार को रखकर बोले कि आज मंगलवार है...
क्योंकि आज प्रभात खबर ने अपने रांची संस्करण में पृष्ठ संख्या 3 जो सिटी फर्स्ट के नाम से जानी जाती है, उसमें आज का पंचांग में स्पष्ट रूप से उद्धृत किया है कि आज पंचमी तिथि है जो रात्रि के 8.42 तक रहेगी और उसके उपरांत षष्ठी तिथि है। प्रभात खबर के इस दिये पंचांग के अनुसार आज वृहस्पतिवार नहीं, बल्कि मंगलवार है, उसने आज पर्व त्यौहार में लिखा है कि आज ऋषि पंचमी व्रत और रक्षा पंचमी है।
यानी ये वहीं बात हो गयी...
मैं चाहे, वो करूं, मैं चाहे जो करूं
मेरी मर्जी...
यानी बेशर्मी की सारी सीमा पार कर दी है, इस अखबार ने, पर कोई बोलनेवाला नहीं, सभी चुप्पी साधे हुए हैं...
शर्मनाक...

Monday, September 12, 2016

देखिये बिहार के बेशर्म पत्रकारों को...

हत्या और शव को तेजाब से गला देने के जिस मामले में शहाबुद्दीन को जमानत मिली है, उस पीड़ित परिवार के घर पर सन्नाटा पसरा है, प्रभावित परिवार के चंदा बाबू और उनकी पत्नी बेहद दुखी है, शहाबुद्दीन के बेल मिलने पर वे राज्य सरकार को कटघरे में रखते है। वे कहते है कि मुझे यहां की व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। तीन बेटों की हत्या के बाद अब उनके दैनिक जीवन पर किसी भी खुशी या गम का कोई असर नहीं होता...
दूसरी ओर हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव की पत्नी ने भी शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने पर चिंता जता दी कि उसे बिहार सरकार पर भरोसा नहीं, उसने सीबीआइ की जांच की मांग कर दी, पर पटना से प्रकाशित अखबार हिन्दुस्तान में ये खबर नहीं है, क्यों नहीं है, ये खबर, आप स्वयं चिंतन - मनन करिये, पता लग जायेगा।
दूसरी ओर जदयू विधायक का चैनल जो रांची से संचालित होता है, उसके पटना के दो संवाददाता नीतीशायन गा रहे है, और बता रहे हैं कि नीतीश साक्षात् परम पिता परमेश्वर है, अगर वे है, तभी बिहार है, नहीं तो बिहार ही नहीं, इसलिए हे बिहार की जनता आपने जो जनादेश नीतीश भगवान को दिया है, उस पर भरोसा रखे, नीतीश भगवान आपका अवश्य उद्धार करेंगे।
ऐसे - ऐसे है, बिहार के पत्रकार जो पैसे के लिए अपनी जमीर तक बेच दिये है...
इन पत्रकारों के सोशल साइटस को देखें तो बेशर्मों को न तो रघुवंश का बयान दिखाई पड़ा है और न ही शहाबुद्दीन की मार से कराह रहे जनता की आवाज सुनाई पड़ी है, इन्होंने अपने मालिक को खुश रखने और नीतीश के चरणोदक पीने में सारी शक्ति लगा दी है।
रांची से प्रकाशित निर्लज्ज अखबार प्रभात खबर की तो बात ही अलग है, उसे नीतीश में खुदा नजर आता है, उसने तो आज पृष्ठ संख्या 18 में नीतीश भक्ति में सारी शक्ति लगा दी, उसने नीतीश को अपना खुदा मानते हुए, उसे बचाने में प्रमुख भूमिका निभा दी और झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के महत्वपूर्ण बयान को सिंगल और छोटा समाचार बनाकर भीतर के पृष्ठ संख्या 8 पर ठेल दिया, वह भी आपको बहुत खोजने पर मिलेगा। वह भी तब, जबकि सर्वाधिक विज्ञापन झारखण्ड सरकार का यहीं अखबार प्राप्त करता हैं और बाकी अखबार उसके आस-पास भी नजर नहीं आते, पर यहां के मुख्यमंत्री रघुवर दास का तार्किक बयान, उसे नहीं सुहाता। वह स्वयं को झारखण्ड का सर्वाधिक प्रसारित अखबार बताता है, पर रांची से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धनबाद, देवघर और दुमका का इलाका बता देता है कि इस अखबार की क्या स्थिति है।
हमारा मानना है कि कोई भी व्यक्ति अगर वह पत्रकार है तो कम से कम निरपेक्षता दिखाएं, नीतीश भक्ति में न डूबे, नीतीशायन न गाये, वह यह भी देखे कि नीतीश के कुकर्मों से सामान्य जनता को क्या दिक्क्ते आ रही है...मैं तो देख रहा हूं कि जिस नीतीश के कुकर्मों के शिकार एक अखबार में काम करनेवाले पत्रकार हो रहे है, वो संस्थान का संपादक, प्रबंधक और वहां काम करनेवाले तथाकथित "लाल झंडा करे पुकार, इन्कलाब जिंदाबाद" का नारा लगानेवाले तथाकथित वामपंथी पत्रकार भी नीतीश की जयकारा लगा रहे हैं...

Saturday, September 10, 2016

पूरा बिहार पगलाया हुआ है, शहाबुद्दीन को लेकर...............

पूरा बिहार पगलाया हुआ है,शहाबुद्दीन को लेकर...
बेचारा नीतीश लालू का चरणामृत ग्रहण करने के बाद बिहार में अखंड शासन का सुखभोग रहा है...
मैं कहता हूं कि शहाबुद्दीन जेल से छूट गया तो क्या हो गया...
इसमें पगलाने की जरुरत ही क्या है...
इतिहास के पन्ने पलटो...
आजादी के पूर्व में कोई भी एक ऐसा अंग्रेज का नाम बताओ, जिसे सजा मिली हो, यहां तक की जनरल डायर जिसने अमृतसर के जालियावालां बाग में गोलियां चलाई, सैकड़ों निहत्थों को मौत के घाट उतार दिया, क्या उसे भी अंग्रेजों ने सजा दी?
और
आजादी के बाद, एक भी ऐसे नेता का नाम बताओ, चाहे वो कोई भी पार्टी से आता हो, उसे किसी भी अदालत ने सजा दी, दिमाग लगाओ, अरे सारे नेता कुछ दिन के लिए जेल जाते है, फिर जमानत पर निकल आते है और सुप्रीम कोर्ट तक जाते - जाते किसी न किसी बहाने दोषमुक्त हो जाते है,
अरे भाई
आपको ये बात क्यों नहीं समझ आती कि हर नेता जेल जाने के समय, ये डायलॉग जरुर बोलता है कि भाई हमें न्यायालय पर और देश के कानून पर पूरा भरोसा है...
इस भरोसे का मतलब नहीं समझते यार...
तुम एक दिन देखना कि चारा खा जानेवाला नेता लालू यादव भी एक न एक दिन अदालत से जरुर बरी हो जायेगा...
नीतीश बुर्बक थोड़े ही हैं, वो देश की न्यायिक व्यवस्था को, यहां की जनता के दिमाग को जानता है...
इसीलिए चारा घोटाले और अन्य घोटाले में बार-बार लालू को कटघरे में खड़ा करने के बावजूद अंत में नीतीश, लालू का चरणामृत ग्रहण कर सो गया...
और सोने के पूर्व, चरणामृत पीते-पीते क्या श्लोक बोला -
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्याप्त नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।
अब ये नीतीश उत्तम प्रकृति का है, या अधम प्रकृति का...
समझते रहिये...

Thursday, September 8, 2016

रांची पुलिस और ईमानदार – ये बात कुछ हजम नहीं हुई.........

रांची पुलिस और ईमानदार – ये बात कुछ हजम नहीं हुई...
रांची पुलिस ने जयपुर से न्यूज इंडिया चैनल के मालिक वी एस तोमर को गिरफ्तार क्या कर लिया, रांची पुलिस की जय – जय हो रही है, जैसे लगता है कि रांची पुलिस दूध की धूली है...
ये वहीं रांची पुलिस है कि जिसके लोग कभी वीएस तोमर प्रकरण पर ही तोमर को महान घोषित कर चुके है, जो उस वक्त रांची के सभी अखबारों में छपी थी...
कई बार तोमर को गिरफ्तार करने के लिए रांची से पुलिस गई और जयपुर जाकर तोमर से उपकृत हुई, पर आज तक उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई...
ये वहीं रांची पुलिस है, जो रांची में ही संचालित न्यूज 11 के मालिक अरुप चटर्जी को सुरक्षा गार्ड तक मुहैया करायी हुई है, उस अरूप चटर्जी पर जिसके खिलाफ रांची की न्यायालय ने कुर्की जब्ती तक का आदेश दिया, जिसके खिलाफ केस लड़ रहे गुंजन सिन्हा ने रांची के एसएसपी से एक नहीं कई बार गुहार लगायी, पर चूंकि अरूप चटर्जी पहले आजसू और अब भाजपा का नेता बन चुका है, उसे गिरफ्तार नहीं करती...
कई मामले तो मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र मे भी ऐसे ऐसे आये है...
जिससे रांची पुलिस का चरित्र उजागर हो जाता है। रांची पुलिस तो मुख्यमंत्री के सीधी बात में आये प्रश्नों को भी हवा में उड़ा देती है, जिसका प्रमाण है लालपुर थाना से संबंधित एक कम्प्यूटर शॉप और मकान मालिक का प्रकरण, जिस पर मुख्यमंत्री ने सीधी कार्रवाई कर समस्या का समाधान करने को कहा, पर रांची पुलिस ने इस पर कार्रवाई तो दूर ध्यान ही नहीं दिया...
हमें वी एस तोमर प्रकरण पर, प्रेमचंद का लिखा नमक का दारोगा कहानी याद आ गया। मुंशी वंशीधर पं. अलोपीद्दीन को गिरफ्तार कर लेते है, पर आम जनता में ये बात ज्यादा घर कर रही है, कि पं. अलोपीद्दीन इतने रसूखवाले आदमी पुलिस की गिरफ्त में कैसे?
यहां मुंशी वंशीधर ईमानदार है, पर रांची पुलिस ईमानदार नहीं हैं...
मैं अच्छी तरह से तोमर को जानता हूं...
एक नंबर का इडियट और लड़कियों को देखकर फिसल जानेवाला आदमी है...
उसके बहुत सारे ऐसे – ऐसे लोगों से रिश्ते है, जिसे सुन और जानकर आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे...
प्रख्यात हिदूवादी नेता प्रवीण भाई तोगड़िया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाई के साथ फोटो खींचवाकर ये बहुत आनन्दित होता है, यहीं नहीं वह इन लोगों को जयपुर स्थित अपने यूनिवर्सिटी बुलाता है, अपने चैनल में कार्यक्रम करवाता है, लंदन स्थित जयपुर के लोगों द्वारा होनेवाले कार्यक्रम में खुद को महिमामंडित करवाता है और दिन भर उस महिमामंडित होनेवाले कार्यक्रम की अपनी टीवी पर न्यूज भी चलवाता है...
उधर बिहार से भी एक खबर आ रही है, महान देशभक्त शहाबुद्दीन जेल से छूट रहे है...
वाह-वाह सचमुच बिहार भी जग रहा है, दारू के नशे से छुटकारा के बाद, असली छुटकारा जिंदगी से शहाबुद्दीन ही देंगे और उनके कार्यों की, उनकी देशभक्ति की सुरक्षा का जिम्मा बिहार पुलिस करेंगी...
और चिरकूट टाइप के बिहार के पत्रकार उनकी आरती गायेंगे...